अधूरे ख्वाब


"सुनी जो मैंने आने की आहट गरीबखाना सजाया हमने "


डायरी के फाड़ दिए गए पन्नो में भी सांस ले रही होती है अधबनी कृतियाँ, फड़फडाते है कई शब्द और उपमाएं

विस्मृत नहीं हो पाती सारी स्मृतियाँ, "डायरी के फटे पन्नों पर" प्रतीक्षारत अधूरी कृतियाँ जिन्हें ब्लॉग के मध्यम से पूर्ण करने कि एक लघु चेष्टा ....

Saturday, May 7, 2011

"माँ की खुशबु "("मातृ दिवस "पर सभी मित्रों को शुभकामनायें )


'पीहर' आते  ही,'माँ' जब तू  गले लगाती है  
अपने हाथों से जब तू कौर बना खिलाती है  
तुझसे 'माँ' वही पहचानी  सी  खुशबु आती है
नए घड़े  के पानी से जैसे सोंधी खुशबु आती है "
~~~S-ROZ ~~~
 

Thursday, May 5, 2011

"ये कैसा प्रेम कैसी भक्ति है?"

प्रभु ! मै तुम्हे दूर से प्रणाम करती हूँ
क्यूँ, पास आकर तुम्हारा  हाथ नहीं थामती?
पिता समान तुम्हारे  चरण स्पर्श करती हूँ 
क्यूँ,  मित्र स्वरुप  गले नहीं लगा पाती  
पता है मुझे तुमसे, मिलन का मार्ग 
क्यूँ, उस मार्ग पर चलने का साहस नहीं जुटा पाती 
भक्ति से नैवेद्य,पुष्प अर्पण करती हूँ
क्यूँ, मीत समझ प्रीत नहीं कर पाती
जीवन पथ पर चलते चलते थक जाती हूँ
क्यूँ, तब अनंत विश्राम को  तुम्हारे पास आने से डरती हूँ !
प्रभु! तुमसे ये कैसा प्रेम ,कैसी भक्ति है?
~~~S-ROZ ~~~
 
 

Tuesday, May 3, 2011

"पावं जलते हैं,"

"सुनहरे ख्वाब!!!
जो सच होते नहीं फिर भी
क्यूँ आँखों में वो पलते हैं
चलो अब लौट चले,इस
तपते इंतज़ार के सहरा से
जो चल ना पड़े तो पावं जलते हैं,
~~~S ROZ ~~~

Sunday, May 1, 2011

"गावं और बुजुर्ग "

"गावं के घर कि दीवार ढह चुकी!
अब कोई नहीं रहता वहां,
सिवाय चमगादड़ों के
पर कराहती आवाजों में
बुजुर्गों कि दुआएं
अब भी वहां गूंजती है कानो में
~~~S-ROZ~~~


Saturday, April 30, 2011

"मै सागर कि मीन,

"मै सागर कि मीन,
मेरे आंसू देखे कौन
निशि के इस कोलाहल में
सुन पाते तुम मेरा मौन "
~~~S-ROZ~~~

Tuesday, April 26, 2011

"हार गयी मैं.. "

तुमसे मिले

उस माधुर्य को एकत्र कर..

मोतियों जैसा उज्ज्वल..

सौम्य निर्मल..

ना रख पाई..

मन के किसी कोने में

अहं अभी शेष है ..

तभी उन स्मृतियों को

अंतर्मन में..

परिरक्षित ना कर पाई..

सच!आज..हार गयी मैं.. ..!!!

.

नकारात्मकता को

सकारात्मकता में

परिणत करने का

मेरा हर संभव प्रयास

असफल रहा ............

उस गगन सदृश

व्याप्त प्रतिभाओं को..

तुम्हारे शौर्य अनुसार

आंक नहीं पाई..

सच !!आज,हार गयी मैं.. ..!!!

~~~S-ROZ ~~~


Wednesday, April 20, 2011

"उम्मीद भरा इक हाथ रहे "

"लोगों की भीड़ सब ओर है
हर तरफ हो रहा शोर है
बाहर बेगानों के मेले है
अंदर हम कितने अकेले हैं"
. 
"कुछ दिनों  पहले "बहल बहनों"(noida) के बारे में सुना और पढ़ा जिन्होंने  अपनों के गम में ६ महीनो से खुद को घर में बंद कर उसे कब्रगाह बना लिया और पड़ोसियों को इल्म नहीं .....क्या सच ,हम सभी की संवेदनाये.अपनापन,भाईचारा सब शेष हो चुका  हैं ???ऐसा आगे ना हो इसलिए
आइये हम सभी हर दिल के दरवाजे पर दस्तक दे ताकि ...
.
"घरों में  खुद को, यु ना कोई क़ैद करे
अपनों के गम में तिल तिल ना कोई  मरे  
इस जहाँ में सबको  साथ की आस रहे ,
मेरा अपना है कोई, ऐसा विश्वास रहे
हर हाथ के पास उम्मीद भरा  इक  हाथ रहे
~~~S-ROZ ~~~