'पीहर' आते ही,'माँ' जब तू गले लगाती है
अपने हाथों से जब तू कौर बना खिलाती है
तुझसे 'माँ' वही पहचानी सी खुशबु आती है
नए घड़े के पानी से जैसे सोंधी खुशबु आती है "
~~~S-ROZ ~~~
तुमसे मिले
उस माधुर्य को एकत्र कर..
मोतियों जैसा उज्ज्वल..
सौम्य निर्मल..
ना रख पाई..
मन के किसी कोने में
अहं अभी शेष है ..
तभी उन स्मृतियों को
अंतर्मन में..
परिरक्षित ना कर पाई..
सच!आज..हार गयी मैं.. ..!!!
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नकारात्मकता को
सकारात्मकता में
परिणत करने का
मेरा हर संभव प्रयास
असफल रहा ............
उस गगन सदृश
व्याप्त प्रतिभाओं को..
तुम्हारे शौर्य अनुसार
आंक नहीं पाई..
सच !!आज,हार गयी मैं.. ..!!!
~~~S-ROZ ~~~