अधूरे ख्वाब


"सुनी जो मैंने आने की आहट गरीबखाना सजाया हमने "


डायरी के फाड़ दिए गए पन्नो में भी सांस ले रही होती है अधबनी कृतियाँ, फड़फडाते है कई शब्द और उपमाएं

विस्मृत नहीं हो पाती सारी स्मृतियाँ, "डायरी के फटे पन्नों पर" प्रतीक्षारत अधूरी कृतियाँ जिन्हें ब्लॉग के मध्यम से पूर्ण करने कि एक लघु चेष्टा ....

Wednesday, July 18, 2012

"वह अज्ञात "

ह्रदय बिंदु में
अश्रु सिन्धु में
डूबते ..
उतरते ..
तिरते ...
किनारे की आस
मिलन की प्यास
बुझती स्वांस
दैहिक ह्रास
किन्तु .......!
वह अज्ञात ..वह अज्ञात ..वह अज्ञात !!!
~S-roz~

6 comments:

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    1. हार्दिक आभार आपका संगीता जी

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  2. वाह ... बेहतरीन

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    1. हार्दिक आभार आपका सदा जी !

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  3. बेजोड़ भावाभियक्ति....

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  4. बेहतरीन.....
    बहुत अच्छी अभिव्यक्ति......

    अनु

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