अधूरे ख्वाब


"सुनी जो मैंने आने की आहट गरीबखाना सजाया हमने "


डायरी के फाड़ दिए गए पन्नो में भी सांस ले रही होती है अधबनी कृतियाँ, फड़फडाते है कई शब्द और उपमाएं

विस्मृत नहीं हो पाती सारी स्मृतियाँ, "डायरी के फटे पन्नों पर" प्रतीक्षारत अधूरी कृतियाँ जिन्हें ब्लॉग के मध्यम से पूर्ण करने कि एक लघु चेष्टा ....

Saturday, September 4, 2010

दिल से निकले कुछ गुबार

"बचपन मे लकीरों के खेल बहुत खेलें हैं कुछ छोटी ,
कुछ बडी होती लकीरें पर क्या इन्सनियत के रुबरु कभी इन्सानो को मापा है?
इन्सानो की माप शायद कद से नही होती ,
मैने इस भीड मे ऐसे कई कद्दावर बौने देखे है जो गरीबों के घर जलाते ,
महिलाओं को बे आबरू करते
मानवता का खून करते निशछंद घुमते हैं
जो कद मे तो बहुत लम्बे हैं पर ना जाने क्यु दिखते बौने हैं "


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"रेल की इक पटरी ने दुसरी से कहा "क्या हमारा मिलन कभी सम्भव है?"
दुसरी ने जवाब दिया "कभी नही ",
"हम मात्र पटरियाँ ही नही ....."..
राह्गीरों को उनकी मन्जिल तक पहुचाते भी है ",
यदि हमारा मिलन हुआ तो ये अपनो से हमेशा के लिए बिछड जाएंगे ...... .
इससे बेहतर है के हम कभी ना मिले ......"


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‎"आहें भरोगे ,आवाज दोगे ...
कोइ ना होगा पास तुम्हारे ,
आवाज तुम्हारी ही तुम तक लौट के आएगी ,
दर्दोगम की साथी बन तुम्हारे मर्म सहलायेगी,
क्युकी ....................
अपनों से भरी दुनिया मे आपक़ा अपने सिवा "अपना" कोइ नही होता "
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‎"हम त जल के मछरिया हमरे लोरवा देखि के?
भैया जनमले थरिया बाजल,हमके जिए दिही के ?
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.कन्या भ्रूण को पैदा होने से पहले ही मार देना प्रगतिशीलता की देन है जिसे तकनीकी तरक्की ने आसान बना दिया है. लोग उसी डाल को काट रहे हैं जिस पर बैठे हैं. मूर्खता ही नहीं यह एक शर्मनाक कर्म है. इंसान के बनाये कानून का ही उल्लंघन ही नहीं, ख...ुदा के कानून का भी उल्लंघन है
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"गम के सहरा मे,मुट्ठी भर रेत सी खुशी,
संभाले ना सम्भाली गई
"बचे थे कुछ जर्रे मुट्ठी मे
 सोचा क्यु कैद करु इन्हे
सो उन्हे भी निजात मिल गई "


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16 comments:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  2. बहुत सुंदर मार्मिक और सन्देश भी

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  3. सुन्दर मार्मिक लेख है|

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  4. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

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  5. bhn sroj ji bhut thik likhaa he khud kaa drd khud hi shnaa pdhta he isi liyen to hm akhtar khan akela hen. akhtar khan akela kota rajsthan

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  6. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
    हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

    ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

    आप भी सादर आमंत्रित हैं,
    http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/ पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।
    यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

    हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

    धन्‍यवाद

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  7. bhn sroj ji mere blog pr aane ke liyen dhnyvaad men jaanta hun a men aap se ablog ke maamle me achchaa lekhn kese kren iske tips letaa rhungaa. akhtar khan akela kota rajsthan

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  8. सरोज जी,

    "हम वो पत्थर हैं जो गहरे गढ़े रहे बुनियादों में,
    शायद तुमको नज़र न आये, इसीलिए मीनारों में,"

    एक लफ्ज़ सिर्फ सुभानाल्लाह ..............दिल जीत लिया आपने इतना कहके वाह...वाह........बहुत ही खूबसूरती से अहसासों को लफ्जों में पिरोया है आपने ....आपका लिखने का अंदाज़ बहुत पसंद आया...........इस उम्मीद में के आगे भी ऐसे ही खुबसूरत जज़्बात मिलेंगे ....इसलिए आपको फॉलो कर रहा हूँ.......शुभकामनाये|

    कभी फुरसत मिले तो हमारे ब्लॉग पर भी आयिए -

    http://jazbaattheemotions.blogspot.com/
    http://mirzagalibatribute.blogspot.com/
    http://khaleelzibran.blogspot.com/
    http://qalamkasipahi.blogspot.com/

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  9. आदरणीय सरोज जी,

    बहुत सुन्दर, संवेदनशील, कडवा सच और सही अन्दाज में, सलीके से अपनी बात कहने की कला में महारत हासिल करके आप साहित्य सृजन में योगदान कर रही हैं। जिसके लिये मानव समाज को आपका ॠणी होना होगा।

    आप अच्छी लेखिका हैं। नौकरी से अधिक समाज की कडवी सच्चाईयों को अभिव्यक्ति देना जरूरी है।

    यदि परिवार को चलाने के लिये आर्थिक संसाधन अपर्याप्त हों तो ही सोचें, अन्यथा अपने बच्चों के सही समाजीकरण के लिये आप अपना योगदान करें।

    बेशक आज के समय में स्त्रियों में अनेकानेक कारणों से नौकरी के प्रति अगाध लगाव है, लेकिन स्त्री के स्त्रैण गुणों को अवरुद्ध करके चुकायी जाने वाली कीमत पर नौकरी का चुनाव दु:खद आश्चर्य है।

    शुभकामनाओं सहित।
    शुभाकांक्षी
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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  10. bahut khub...
    yun hi likhte rahein....
    hamare blog par bhi aapka swagat hai.....

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  11. हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  12. आपका लिखने का अंदाज़ बहुत पसंद आया....

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